मेरी उपलब्धि

कितना खोया है मैंने 
बस तुमने मेरा पाना देखा 
कितना रोया है मैंने
बस तुमने मेरा हँसना देखा ।

कितने सपने टूटे बिखरे मेरे
बस तुमने सच होना देखा 
कितनी रातें जाग बिताई मैंने 
बस तुमने मेरा सोना देखा ।

मन का कल्मष धोया किसमें 
बस तुमने मेरा भूलना देखा 
कितनी पीड़ा दी है जग ने
केवल तुमने मेरा सहना देखा ।

कितने शब्द वाण हैं बेधे मुझको 
बस तुमने मेरा सुनना देखा 
कितने शूल चुभे पद तल में
बस तुमने मेरा चलना देखा ।

हैं कितने अवसाद गूंथे इनमें 
बस तुमने मेरा गहना देखा 
पत्र हीन जीवन बगिया में 
बस तुमने मेरा खिलना देखा ।

कितना मन का सूना दर्पण 
बस तुमने उसका भरना देखा 
कितना दुःख दर्द सहा जीवन में 
बस तुमने मेरा खुश रहना देखा ।

शैल सिंह 
सर्वाधिकार सुरक्षित 



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