ऐ कविता शब्दों की तह में मेरे सारे दर्द छुपा लेना , जब अंतस् का भाव जगे और हृदय आकुल हो जाये भींच अंक में सकल वेदना पंख पे कलम बिठा लेना ऐ कविता शब्दों की तह में मेरे सारे दर्द छुपा लेना , भर जाये कोरी छाती जब मुझको बस इतना दे देना काग़ज़ का थोड़ा सा कोना प्रिय मेरे लिए बचा लेना ऐ कविता शब्दों की तह में मेरे सारे दर्द छुपा लेना , जब पीड़ा वश से बाहर हो और उसे मैं भूल ना पाऊँ जिसे बाँट सके ना कोई अपना तब भागीदार बना लेना ऐ कविता शब्दों की तह में मेरे सारे दर्द छुपा लेना , भीगे दामन में इतना ऋण देना शब्दों की ऊर्जा बाढ़ रोक ले मन का मीत मैं तुझमें ढूँढूँ अपनी प्रेयसी मुझे बना लेना ऐ कविता शब्दों की तह में मेरे सारे दर्द छुपा लेना , सहना मुश्किल हो जाये जब और मैं शिथिल विकल हो जाऊँ जीवन से उकता जाऊँ जब जीने की राह दिखा देना ऐ कविता शब्दों की तह में मेरे सारे दर्द छिपा लेना , प्यार भरी अतलांत नदी में मन पलाश जब डूबना चाहे ऐ कविता मेरी प्रिय सहचरी अपनी कड़ियों में उलझा लेना ऐ कविता शब्...